Sunday, June 26, 2022

अगर हनुमान एक बन्दर नहीं थे तो उनकी पूंछ कैसे थी ?

 उत्तर :  नहीं  वो बन्दर नहीं थे ,  वो वानर थे  | वन में  रहने वाले नर को वानर कहते हैं | ये एक प्रजाति है | वो  चारों  वेदों से पंडित थे | और संस्कृत का उच्चारण बहुत शुद्ध  था | जब राम और लक्ष्मण पहली बार उनसे मिले थे तब उनकी  संस्कृत के उच्चारण और वेदों के उच्च ज्ञान का वर्णन आता हैं | 

कोई बन्दर ना तो संस्कृत बोल सकता है और ना ही  उसके मुख की बनावट इस तरह की होती है की वो संस्कृत बोल सके | 


उनकी विद्वत्ता और ज्ञान के कारण समाज में उनकी बहुत पूंछ थी | जिसे अज्ञानी लोगों  ने सचमुच की पूंछ  कहना शुरू कर दिया |

क्या बहुत से पाप करके गंगा में नहा लेने से पाप मुक्त हो जायेंगे ?

उत्तर :  कर्म फल के सिद्धांत के अनुसार आपको किये गए अच्छे और बुरे कर्मों  का फल भोगना ही होगा ? इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म से वो carry  forward  हो कर आपको भोगना ही होगा | 

इसी कारण कोई व्यक्ति जन्म ही राजा के घर में ले लेता है और कोई जन्म से ही अपंग पैदा होता है  | 



कुम्भ में मेले में ज्ञान की गंगा बहा करती थी  | इसमें पुरे विश्व के साधू संत विद्वान आकर हर 12  वर्ष  में सामाजिक परिस्थितियों का चिंतन और समीक्षा करते  थे , और समाज को सही दिशा में कैसे ले जायगा जाए इस पर चर्चा करते थे |

Thursday, March 12, 2020

हिन्दू धर्म ग्रंथों में मिलावट को कैसे पहचाने ?

उत्तर  :  
1. जो ग्रन्थ वेद विरुद्ध है और अविज्ञानिक ( Non Scientific ) है वो मिलावटी है
2. ग्रन्थ में जो विषय चल रहा हो उसमे अचानक दुसरे अप्रासंगिक विषय का आ जाना ये दर्शाता है की ये अप्रासंगिक विषय बीच में घुसाए गए हैं | जैसे अगर शाकाहार के लाभ बताये जा रहे हैं और बीच में मांसाहार के फायदे की बात अगर चल पड़े और फिर वापस शाकाहार के लाभ आ जाएँ तो मतलब वो मिलावट है
4. जो घटना या कार्य कारण सहित ना बतायी गयी हो उसे मिलावट समझें |
5. माया / जादू /अव्यवहारिक / अप्राकृतिक  बातों को मिलावट समझे |  जैसे -  जो पात्र अगर 9 लाख साल पुरानी रामायण में  है और 5100 साल पुरानी महाभारत में भी आ जाएँ  तो ये अव्यवहारिक बात है | सूर्य को मुहं में ले लेना, पसीने से संतान का पैदा  होना  ये  अव्यवहारिक और अप्राकृतिक  ही हैं | 





Friday, March 6, 2020

राम ने गर्भवती सीता को घर से क्यों निकाला ?

क्या ब्रह्मा ने अपनी पुत्री सरस्वती से विवाह किया था ?

उत्तर : प्रशन का उत्तर इस विडियो में 4.00 मिनट पर है

दूसरे की पत्नी से धोखे से दुष्कर्म करने वाले इंद्र देवताओ के राजा कैसे हुए ?


हिदुओं में जातिवाद और छुआछूत क्यों था और अब भी है ? जैसे कर्ण के साथ हुआ


हिन्दुओ के इतने सारे भगवन क्यों है ? कुछ तो बन्दर, हाथी और सुवर जैसे भी है ?

  1. हिन्दू गाय की पूजा क्यों करते हैं ?
  2. हिन्दू मूर्तिपूजक क्यों है 
उत्तर :  https://www.hinduismtoday.com/modules/smartsection/item.php?itemid=1327

ढोल गंवार शुद्र और नारी , ये सब ताडन के अधिकारी - में शूद्रों का अपमान क्यों किया है?


Tuesday, March 3, 2020

क्या श्री राम और श्रीकृष्ण भगवान थे ?

उत्तर : वे महापुरुष थे जिनका जन्म व् मृत्यु दोनों हुए थे | सामाजिक  और जनकल्याण के कार्यों में अपना जीवन समर्पित करने के कारण वे पूजनीय और आदरणीय है |

उदाहरण :  इसी प्रकार आज महाराष्ट्र  के मंदिरों में शिवाजी महाराज और बाल गंगाधर तिलक जी की प्रतिमा और चित्रों की पूजा भी उनके महान सामाजिक कार्यों के लिए होती है और निश्चित रूप से भगवान नहीं थे |
बाल गंगाधर तिलक जी और साईं बाबा की तो कैमरे से खिची हुई फोटो भी उपलब्ध है |







हिन्दुओ के तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का क्या रहस्य है

उत्तर : 
संस्कृत में कोटि शब्द का एक अर्थ करोड़ है और दूसरा प्रकार अर्थात श्रेणी भी। तार्किक दृष्टि से देखा जाए तो कोटि का दूसरा अर्थ इस विषय में अधिक सत्य प्रतीत होता है अर्थात तैंतीस प्रकार की श्रेणी या प्रकार के देवी-देवता। 

 वेदों में जिन देवताओं का उल्लेख किया गया है उनमें से अधिकतर प्राकृतिक शक्तियों के नाम है जिन्हें देव कहकर संबोधित किया गया है।  उक्त प्राकृतिक शक्तियों को मुख्‍यत: आदित्य समूह, वसु समूह, रुद्र समूह, मरुतगण समूह, प्रजापति समूह आदि समूहों में बांटा गया हैं।

8  वसु :अर्थात हमें वसाने वाले आत्मा का जहां वास होता है। ये आठ वसु हैं: धरती, जल, अग्नि, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य और नक्षत्र। ये आठ वसु प्रजा को वसाने वाले अर्थात धारण या पालने वाले हैं।


11 रूद्र   दरअसल यह रुद्र शरीर के अव्यय है। जब यह अव्यय एक-एक करके शरीर से निकल जाते हैं तो यह रोदन कराने वाले होते हैं। अर्थात जब मनुष्य मर जाता है तो उसके भीतर के यह सभी 11 रुद्र निकल जाते हैं जिनके निकलने के बाद उसे मृत मान लिया जाता है। तब उसके सगे-संबंधी उसके समक्ष रोते हैं।

शरीर से निकलने वाले इन रुद्रों ने नाम हैं:- प्राण, अपान, व्यान, समान, उदान, नाग, कुर्म, किरकल, देवदत्त और धनंजय। प्रथम पांच प्राण और दूसरे पांच उपप्राण हैं अंत में 11वां जीवात्मा हैं। ये 11 जब शरीर से निकल जाते हैं तो सगे-संबंधी रोने लग जाते हैं। इसीलिए इन्हें कहते हैं रुद्र। रुद्र अर्थात रुलाने वाला। 

 12 आदित्य :  आदित्य आदित्य सूर्य को कहते हैं। भारतीय कैलेंडर सूर्य पर ही आधारित है। समय के 12 माह को 12 आदित्य कहते हैं। इन्हें आदित्य इसलिए कहते हैं क्योंकि यह हमारी आयु को हरते हैं। जैसे-जैसे समय बढ़ता जाता है हमारी आयु घटती जाती है। ये बारह आदिय 12 माह के नाम हैं। सूर्य की 12 रश्मियों को भी इन्हीं की श्रेणी में रखा गया है।  


32 वां इंद्र  :   इंद्र का अर्थ बिजली या ऊर्जा। 33वां है यज्ज। यज्ज अर्थात प्रजापति, जिससे वायु, दृष्टि, जल और शिल्प शास्त्र हमारा उन्नत होता है, औषधियां पैदा होती है। ये 33 कोटी अर्थात 33 प्रकार के अव्यव हैं जिन्हें देव कहा गया। देव का अर्थ होता है दिव्य गुणों से युक्त। हमें ईश्वर ने जिस रूप में यह 33 पदार्थ दिए हैं उसी रूप में उन्हें शुद्ध, निर्मल और पवित्र बनाए रखना चाहिए।